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देश में डॉक्टर नहीं, पेपर माफिया तैयार हो रहे हैं!: रंजीत कुमार

Chief Editor Ranjeet Kumar May 18, 2026 1 मिनट का पाठ
देश में डॉक्टर नहीं, पेपर माफिया तैयार हो रहे हैं!: रंजीत कुमार

इस देश में दो तरह के छात्र हैं।एक वो, जो रात-रात भर जागकर किताबों में भविष्य खोजते हैं।दूसरे वो, जो सिस्टम के अंधेरे कमरों में प्रश्नपत्र खोज लेते हैं।पहले वाले छात्र के मां-बाप खेत बेचते हैं, गहने गिरवी रखते हैं, कोचिंग की फीस भरते हैं, उम्मीद पालते हैं कि बेटा-बेटी डॉक्टर बनेंगे।दूसरे वाले छात्र नहीं, व्यवस्था के चहेते खिलाड़ी होते हैं—जिन्हें मेहनत नहीं, नेटवर्क चाहिए।

अगर यह सच है कि एक प्रोफेसर के घर पर “स्पेशल क्लास” चल रही थी और वही सवाल बाद में NEET के पेपर में मिल गए, तो यह सिर्फ पेपर लीक नहीं है।यह लाखों छात्रों की मेहनत की हत्या है।इस देश में शिक्षा अब मंदिर नहीं रही, मंडी बनती जा रही है।सवाल सिर्फ एक प्रोफेसर का नहीं है।सवाल यह है कि क्या इतना बड़ा खेल अकेले कोई प्रोफेसर कर सकता है?

NEET कोई मोहल्ले का टेस्ट नहीं है।यह देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक है।इसमें सुरक्षा की कई परतें होती हैं।तो फिर पेपर बाहर कैसे आया?कौन लोग हैं जो शिक्षा को कारोबार बना रहे हैं?किसके संरक्षण में यह साहस आता है?और अगर किसी संस्थान के राजनीतिक संबंधों पर सवाल उठ रहे हैं, तो जांच एजेंसी को हर एंगल देखना चाहिए।लेकिन आरोप और राजनीतिक संबद्धता, दोनों को अदालत में सबूत से परखा जाना चाहिए—टीवी डिबेट की चीख से नहीं।

दिक्कत यह है कि इस देश में जब गरीब का बेटा परीक्षा देता है तो उससे कहा जाता है—“मेहनत करो।”और जब रसूख वाला सिस्टम में सेंध लगाता है, तो कहा जाता है—“जांच चल रही है।”जांच…यह एक बड़ा आरामदायक शब्द है।छात्र का एक साल चला जाए—जांच।परिवार टूट जाए—जांच।मानसिक तनाव में कोई बच्चा बिखर जाए—जांच।लेकिन जो लोग इस पूरे खेल के सूत्रधार हैं, क्या वे सिर्फ गिरफ्तार होकर खबर बनेंगे या सजा पाकर मिसाल भी बनेंगे?क्योंकि यह सिर्फ पेपर लीक नहीं है।यह उस भरोसे का लीक होना है, जो एक गरीब परिवार शिक्षा पर करता है।

देश का भविष्य मेडिकल कॉलेज में बनना चाहिए था,अगर वह कोचिंग के बैकडोर और सत्ता के गलियारों में बन रहा है, तो यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं—राष्ट्रीय शर्म है।लाखों बच्चे परीक्षा हॉल में पसीना बहाते हैं।कुछ लोग एसी कमरों में भविष्य बेचते हैं।और फिर हम कहते हैं—“युवा ही देश का भविष्य हैं।”सवाल है—भविष्य हैं, या सिर्फ इस्तेमाल की जाने वाली भीड़?

Chief Editor Ranjeet Kumar

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