Headlines

Latest posts

All
fashion
lifestyle
sports
tech

Trending News

बिहार में विकास की नई रफ्तार: ग्रामीण इलाकों में बदलेगी तस्वीर 01
02
How Sugar and Sedentary Lifestyle Affects Men
03
Apple iMac M1 Review: the all-in-one for almost everyone
04
Businesses need community support to stay afloat

Popular

“मकड़ी के जाल में फंसी सेहत: पूछ रहे हैं मंगल पांडे — इलाज कहां है?”
“जो गांव की सुरक्षा कर रहे हैं, क्या सरकार उन्हें पहचान भी रही है?”
असम में ग्रामीण चिकित्सकों पर कार्रवाई से बढ़ा विवाद, संगठन ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
“खामोशी की राजनीति और एक आवाज़ का कम हो जाना” : रंजीत कुमार

“मकड़ी के जाल में फंसी सेहत: पूछ रहे हैं मंगल पांडे — इलाज कहां है?”

“बताइए मंगल पांडे जी… ”दरवाज़े पर मकड़ी का जाला है।दीवारों पर छिलता हुआ प्लास्टर है।अंदर एक टूटी कुर्सी है — और उस पर बैठा है इंतज़ार।यह अस्पताल नहीं है, यह व्यवस्था का आईना है।यहां लोग आते होंगे?या सिर्फ मजबूरी आती होगी?कहा जाता है कि यहां डॉक्टर भी आते हैं।शायद आते होंगे…क्योंकि रजिस्टर में साइन तो…

Read More

“जो गांव की सुरक्षा कर रहे हैं, क्या सरकार उन्हें पहचान भी रही है?”

भागलपुर (बिहार)। वर्ष 2015 में स्थापित ग्राम रक्षा दल आज जिले में समाज सेवा और स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरा है। बिना किसी सरकारी सहयोग के शुरू हुआ यह संगठन लगातार जनहित में कार्य करता रहा है और अपनी सक्रियता से लोगों का भरोसा जीत चुका है।कोरोना महामारी के दौरान, जब…

Read More

असम में ग्रामीण चिकित्सकों पर कार्रवाई से बढ़ा विवाद, संगठन ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

गुवाहाटी/विशेष रिपोर्ट: ऑल असम अल्टरनेटिव मेडिसिन प्रैक्टिशनर्स के अध्यक्ष Dr Ashok Kumar Gogoi ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एक बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि गरीबों की सेवा करने वाले ग्रामीण चिकित्सकों को सरकार द्वारा लगातार निशाना बनाया जा रहा है और उन्हें जेल भेजा जा रहा है। डॉ. गोगोई के अनुसार,…

Read More

“खामोशी की राजनीति और एक आवाज़ का कम हो जाना” : रंजीत कुमार

https://www.facebook.com/share/1C2f3WazFR/ कन्हैया कुमार की कहानी किसी एक नेता की कहानी नहीं है, यह उस दौर की कहानी है जहाँ बोलने वाले धीरे-धीरे ‘समझदार’ बना दिए जाते हैं।एक समय था जब उनके भाषणों में जोखिम था—शब्दों में आग थी, और तर्क में वो बेचैनी थी जो सत्ता को असहज करती थी। वो बोलते थे तो लगता…

Read More

UPSSC AGTA भर्ती में आरक्षण को लेकर विवाद, भीम आर्मी ने उठाए सवाल

उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSC) द्वारा कृषि विभाग में तकनीकी सहायक (AGTA) के 2759 पदों पर निकाली गई भर्ती अब विवादों में घिरती नजर आ रही है। भर्ती में वर्गवार सीटों के वितरण को लेकर सामाजिक संगठनों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जारी आंकड़ों के अनुसार, सामान्य वर्ग (UR) को 1692 (61%),…

Read More

गरीब के लिए यही ग्रामीण चिकित्सक“AIIMS” हैं: हर पत्रकार रंजीत कुमार!

गांव में जब कोई बीमार पड़ता है, तो वह पहले संविधान नहीं देखता…वह यह भी नहीं पूछता कि इलाज करने वाला डॉक्टर एमबीबीएस है या नहीं।वह सिर्फ यह देखता है—कौन है जो अभी, इसी वक्त उसकी मदद कर सकता है।और अक्सर… वह होता है—ग्रामीण चिकित्सक। पहली वजह: सिस्टम की अनुपस्थिति में यही व्यवस्था हैंसरकार कागज…

Read More

“झोलाछाप डॉक्टर: महामारी में सहारा, व्यवस्था में सवाल”

यह कहानी सिर्फ “झोलाछाप डॉक्टर” की नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था की है जो गांवों तक कभी पूरी तरह पहुंच ही नहीं पाई। जिस व्यक्ति को हम झोलाछाप कहकर खारिज कर देते हैं, वही व्यक्ति गांवों में कई बार पहला और आख़िरी विकल्प बन जाता है। उसके पास डिग्री नहीं होती, लेकिन वह मौजूद होता है—और कई बार यही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। जब सरकारी अस्पताल दूर हों, डॉक्टर अनुपस्थित हों और निजी इलाज महंगा हो, तब गांव का गरीब मरीज इलाज नहीं, बल्कि “उपलब्धता” ढूंढता है, और यही उपलब्धता उसे ऐसे लोगों तक ले जाती है।
कोरोना महामारी ने इस सच्चाई को और उजागर कर दिया। जब शहरों के बड़े अस्पताल भर गए, ऑक्सीजन की कमी हो गई और स्वास्थ्य व्यवस्था लड़खड़ा गई, तब गांवों में स्थिति और भी जटिल थी। वहां जांच की सुविधा नहीं थी, दवाइयों की कमी थी और डॉक्टरों की मौजूदगी नाममात्र की थी। ऐसे समय में यही झोलाछाप डॉक्टर गांवों में सक्रिय रहे। उन्होंने बुखार, खांसी जैसे लक्षणों का प्राथमिक इलाज किया, लोगों को मानसिक रूप से संभाला और कई जगह बिना किसी सुरक्षा उपकरण के काम करते रहे। यह कहना गलत नहीं होगा कि उस कठिन समय में वे व्यवस्था का हिस्सा नहीं थे, लेकिन व्यवस्था की कमी को भरने का काम जरूर कर रहे थे।
हालांकि यह तस्वीर का सिर्फ एक पक्ष है। झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा किया गया इलाज कई बार खतरनाक भी साबित होता है—गलत दवा, ओवरडोज़, संक्रमण का खतरा और गंभीर बीमारियों की सही पहचान न हो पाना, ये सभी समस्याएं वास्तविक हैं। इसलिए उन्हें पूरी तरह सही ठहराना भी उचित नहीं है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या इस समस्या के लिए सिर्फ वही जिम्मेदार हैं? या फिर एक कमजोर स्वास्थ्य प्रणाली, खाली पड़े प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, डॉक्टरों की कमी और महंगे इलाज की व्यवस्था भी उतनी ही जिम्मेदार है?
दरअसल, झोलाछाप डॉक्टर एक समस्या जरूर हैं, लेकिन उससे बड़ी समस्या वह खाली जगह है जिसे उन्होंने भरा है। अगर गांवों में मजबूत स्वास्थ्य सेवाएं होतीं, पर्याप्त डॉक्टर होते और सस्ती व सुलभ चिकित्सा उपलब्ध होती, तो शायद ऐसे लोगों की जरूरत ही नहीं पड़ती। इसलिए समाधान सिर्फ कार्रवाई नहीं, बल्कि सुधार में है—स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या बढ़ाना और यह सुनिश्चित करना कि हर व्यक्ति को सही और सुरक्षित इलाज मिल सके।
अंत में सवाल वही है—अगर एक दिन अचानक सभी झोलाछाप डॉक्टर गायब हो जाएं, तो क्या हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था गांवों की जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार है? अगर जवाब “नहीं” है, तो हमें यह मानना होगा कि जिसे हम समस्या कहते हैं, वह कहीं न कहीं हमारी व्यवस्था की विफलता का आईना भी है।

Read More

बिहार में विकास की नई रफ्तार: ग्रामीण इलाकों में बदलेगी तस्वीर

पटना, संवाददाता: बिहार में विकास को नई दिशा देने के लिए राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण योजनाओं की शुरुआत की है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले कुछ वर्षों में हर गाँव तक बेहतर…

Read More