बेगूसराय में खेल नहीं, कागज़ों पर खेल हुआ था क्या? : Ranjeet Kumar


गज़ब Ex-DM साहब!मान गए आपको।
आपके प्रशासनिक कौशल पर शोध होना चाहिए।अगर सरकारी योजनाओं को गायब करने की कोई ओलंपिक प्रतियोगिता होती, तो बेगूसराय शायद स्वर्ण पदक जीत चुका होता।

खेलो इंडिया के नाम पर कार्यक्रम हुए।खिलाड़ी मैदान में दौड़े।फोटो खिंची।माला पहनी गई।भाषण हुए।प्रेस विज्ञप्तियाँ जारी हुईं।लेकिन जब एक पत्रकार ने पूछा कि भाई साहब, पैसा कहाँ से आया और कहाँ गया? तो जवाब मिला—”हमारे क्षेत्राधिकार में नहीं आता।”वाह!यानी खेलो इंडिया बेगूसराय में हुआ, लेकिन बेगूसराय प्रशासन को नहीं मालूम।पैसा खर्च हुआ, लेकिन किसी को नहीं मालूम।कार्यक्रम हुए, लेकिन जिम्मेदार कौन था, यह भी नहीं मालूम।
ऐसा लग रहा है कि खेलो इंडिया नहीं, भूत इंडिया योजना चल रही थी।सबने देखा, लेकिन किसी के पास रिकॉर्ड नहीं।आरटीआई लगाइए तो पता चलता है कि डीएम कार्यालय का इससे कोई लेना-देना नहीं।अब सवाल यह है कि अगर डीएम कार्यालय का लेना-देना नहीं था, तो फिर किसका था?कौन था वह अदृश्य महापुरुष जिसने खिलाड़ियों का चयन किया?किसने बजट स्वीकृत किया?किसने भुगतान किया?किसने उपयोगिता प्रमाणपत्र भेजा?किसने ऑडिट कराया?

और सबसे बड़ा सवाल—अगर आपके पास जानकारी नहीं थी, तो आरटीआई आवेदन 90 दिनों तक बैठाकर रखा क्यों गया?आरटीआई कानून कहता है कि पाँच दिनों में संबंधित विभाग को ट्रांसफर कर दीजिए।लेकिन यहाँ पाँच दिन नहीं, नब्बे दिन निकल गए।
लगता है फाइल भी खेलो इंडिया में भाग लेने चली गई थी।बेगूसराय में सरकारी योजनाओं का एक नया मॉडल विकसित हुआ है।कार्यक्रम होगा।फोटो आएगी।फीता कटेगा।समाचार छपेगा।पैसा खर्च होगा।लेकिन जब हिसाब मांगिएगा तो जवाब मिलेगा—”हमारे क्षेत्राधिकार में नहीं आता।”जनता का पैसा।जनता के नाम पर योजना।जनता के सामने कार्यक्रम।लेकिन जनता को हिसाब नहीं।
लोकतंत्र का यह कौन सा खेल है?खेलो इंडिया का पैसा था या जादूगर का रुमाल?जिसे हिलाया और गायब कर दिया?अब सवाल खेल का नहीं है।सवाल यह है कि बेगूसराय में खेल हुआ था या कागज़ों पर कोई और खेल खेला गया था?और अगर सब कुछ नियम के अनुसार हुआ था तो फिर रिकॉर्ड सामने रखने में डर किस बात का है?क्योंकि लोकतंत्र में सबसे खतरनाक खिलाड़ी वह नहीं होता जो मैदान में दौड़ता है।सबसे खतरनाक खिलाड़ी वह होता है जो फाइलों में खेलता है और फिर कहता है—”हमारे क्षेत्राधिकार में नहीं आता।”
