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“मकड़ी के जाल में फंसी सेहत: पूछ रहे हैं मंगल पांडे — इलाज कहां है?”

Chief Editor Ranjeet Kumar April 7, 2026 1 मिनट का पाठ

“बताइए मंगल पांडे जी…

”दरवाज़े पर मकड़ी का जाला है।दीवारों पर छिलता हुआ प्लास्टर है।अंदर एक टूटी कुर्सी है — और उस पर बैठा है इंतज़ार।यह अस्पताल नहीं है, यह व्यवस्था का आईना है।यहां लोग आते होंगे?या सिर्फ मजबूरी आती होगी?कहा जाता है कि यहां डॉक्टर भी आते हैं।शायद आते होंगे…क्योंकि रजिस्टर में साइन तो हर दिन होते हैं।लेकिन मरीज बताते हैं — डॉक्टर नहीं दिखते, सिर्फ तारीख़ दिखती है।दवा मिलती होगी?सरकारी कागज़ कहता है — “हाँ”लेकिन गांव कहता है — “कभी नहीं”तो सच कौन बोल रहा है?कागज़… या दर्द?

अब ज़रा ठहरिए।क्योंकि कहानी यहीं से पलटती है।जब रात के 12 बजे कोई बच्चा बुखार में तपता है,जब अचानक किसी बुजुर्ग की सांस अटक जाती है,जब कोई औरत दर्द से चिल्लाती है —तब यह अस्पताल बंद रहता है।सरकारी एम्बुलेंस का नंबर unreachable रहता है।और तब…एक नाम लिया जाता है — ग्रामीण चिकित्सक।वही “झोलाछाप” जिसे दिन में गाली दी जाती है,रात में भगवान बना दिया जाता है।लोग कहते हैं —अगर ये नहीं रहेंगे, तो गांव महामारी से पहले ही मर जाएगा।तो सवाल यह है मंगल पांडे जी,बीमार कौन है?वो ग्रामीण डॉक्टर,जो बिना डिग्री के इलाज कर रहा है?या वो सिस्टम,जिसके पास डिग्री भी है, बजट भी है,लेकिन न डॉक्टर है, न दवा, न भरोसा?लोग बताते हैं —यहां न आने का साधन है,न रुकने की व्यवस्था।अगर अचानक बीमारी आ जाए,तो इलाज से पहले सफर मार देता है।नीति?वो फाइलों में है।जमीन पर सिर्फ इंतज़ार है।

और अंत में,एक गांव खड़ा है —जिसके पास अस्पताल है,लेकिन इलाज नहीं।जिसके पास सरकार है,लेकिन सहारा नहीं।मंगल पांडे जी,अस्पताल के दरवाज़े पर जो मकड़ी का जाल है —वो सिर्फ जाल नहीं है,वो इस सिस्टम की चुप्पी है।जिस दिन यह जाल हटेगा,शायद उसी दिनइस देश की स्वास्थ्य व्यवस्था सांस ले पाएगी

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Chief Editor Ranjeet Kumar

💬 एक टिप्पणी

  • Sudhir Kumar Mishra,jamui Bihar , 2 months पहले

    , आप का एक एक शब्द समझने सुनने बिचारी करने के लिए है , गरीबी लाचारी विवशता के कारण जनता का जन जीवन अस्त-व्यस्त है, सरकार जमीन पर उतर के देखें तब पता चलेगा,जब रात्रि में सारे सिस्टम सोया रहता है अंधेरी रातें रास्ते ठीक नहीं नदी में पानी और घर में पिता श्री बिमारी से तड़प,उस रात की बैचेनी मानो दिल को झकझोर देने वाला,तब याद आता है मेरे भगवान जिसे झोलाछाप डॉक्टर, और हमारे सभी कष्टों को दूर कर देता , उन्हें उपहार में कुछ देना चाहता तो बोलते भाई अंकल ठीक हो जाने दो फिर जो खुशी होगा वह है मेरे भगवान, दया, द़ष्टि, और समय का पहचान,, जय जोहार, जय श्री राम 🙏

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