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“हर जाति अपने-अपने अपराधी को महापुरुष साबित करने में लगी है”: Ranjeet Kumar

बिहार में इन दिनों एक नया प्रतियोगी परीक्षा मॉडल चल रहा है।प्रश्नपत्र बहुत आसान है।

अगर अपराधी आपकी जाति का है तो उसे “वीर”, “योद्धा”, “मसीहा”, “रॉबिनहुड” और “समाज का रक्षक” घोषित कर दीजिए।अगर वही काम दूसरी जाति का आदमी करे तो उसे “खूंखार अपराधी”, “नरसंहारी”, “गुंडा” और “लोकतंत्र का दुश्मन” बता दीजिए।और अगर कोई पूछ दे कि भाई, हत्या तो हत्या है, अपराध तो अपराध है, तब उसे ज्ञान दीजिए कि तुम्हें राजनीति समझ नहीं आती।

कमाल देखिए।एक आदमी के समर्थक दूसरे आदमी को अपराधी बताते हैं। दूसरा आदमी पहले को अपराधी बताता है। लेकिन दोनों इस बात पर सहमत हैं कि उनका अपना आदमी महापुरुष था।

यानि बिहार में अब अपराध का भी जातिगत आरक्षण हो गया है।हत्या की भी जाति है। नरसंहार की भी जाति है। न्याय की भी जाति है। यहां तक कि आंसुओं की भी जाति है।अगर मरने वाला आपकी जाति का है तो वह शहीद है। अगर दूसरी जाति का है तो वह आंकड़ा है।

सोशल मीडिया पर इतिहास नहीं लिखा जा रहा। अपने-अपने अपराधियों का पीआर अभियान चलाया जा रहा है।जिस राज्य ने डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, कर्पूरी ठाकुर, जयप्रकाश नारायण जैसे लोगों को जन्म दिया, वहां आज बहस इस बात पर हो रही है कि किस अपराधी का ब्रांड वैल्यू ज्यादा है।

अजीब समय है।किसी ने स्कूल नहीं बनाया, फिर भी नायक। किसी ने अस्पताल नहीं बनाया, फिर भी नायक। किसी ने विश्वविद्यालय नहीं बनाया, फिर भी नायक।लेकिन बंदूक थी, गिरोह था, डर था, खून था—बस नायक बनने की योग्यता पूरी हो गई।और फिर लोग कहते हैं कि बिहार बदनाम क्यों है?बिहार बदनाम इसलिए नहीं है कि यहां अपराध हुए।बिहार बदनाम इसलिए है क्योंकि यहां अपराधियों के समर्थक उन्हें इतिहास का महानायक साबित करने में लगे हुए हैं।

समस्या ब्रह्मेश्वर मुखिया, अशोक महतो या शहाबुद्दीन की नहीं है।समस्या उस समाज की है जिसने किताबों से ज्यादा बंदूक की कहानियों को सम्मान देना शुरू कर दिया है।जिस दिन समाज अपराधी की जाति पूछना बंद कर देगा और पीड़ित का दर्द देखना शुरू कर देगा, उस दिन शायद बिहार को नए नायकों की तलाश नहीं करनी पड़ेगी।लेकिन फिलहाल तो स्थिति यह है कि—हर जाति अपने-अपने अपराधी को स्वतंत्रता सेनानी साबित करने में लगी है, और न्याय को कोने में खड़ा करके पूछा जा रहा है. —”तुम्हारी जाति क्या है?”।

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Chief Editor Ranjeet Kumar

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