“जो गांव की सुरक्षा कर रहे हैं, क्या सरकार उन्हें पहचान भी रही है?”

भागलपुर (बिहार)। वर्ष 2015 में स्थापित ग्राम रक्षा दल आज जिले में समाज सेवा और स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरा है। बिना किसी सरकारी सहयोग के शुरू हुआ यह संगठन लगातार जनहित में कार्य करता रहा है और अपनी सक्रियता से लोगों का भरोसा जीत चुका है।कोरोना महामारी के दौरान, जब देश लॉकडाउन की चुनौती से जूझ रहा था, उस समय ग्राम रक्षा दल के सदस्यों ने जरूरतमंदों तक राहत सामग्री पहुंचाने और प्रशासन का सहयोग करने में अहम भूमिका निभाई। संगठन के इस योगदान को स्थानीय स्तर पर काफी सराहना मिली।कोरोना काल के बाद संगठन और अधिक सक्रिय हुआ है। वर्तमान में ग्राम रक्षा दल के सदस्य स्थानीय थाना प्रशासन के साथ मिलकर दुर्गा पूजा, ईद, मोहर्रम, काली पूजा और श्रावणी मेला जैसे धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों में सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।हालांकि, वर्षों की सेवा के बावजूद अब तक संगठन को सरकार की ओर से कोई विशेष मान्यता या आर्थिक सहायता नहीं मिली है। इसके बावजूद सदस्यों का मनोबल ऊंचा है और उन्हें उम्मीद है कि सरकार जल्द ही उनके योगदान को स्वीकार करेगी।

इसी बीच हाल के दिनों में सरकार की ओर से सकारात्मक संकेत मिले हैं। एक आधिकारिक पत्र के जरिए ग्राम रक्षा दल के सदस्यों को प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई है, जिससे संगठन में नई उम्मीद जगी है। सदस्यों को विश्वास है कि प्रशिक्षण के बाद उन्हें औपचारिक रूप से व्यवस्था में शामिल किया जाएगा।जिला अध्यक्ष पिंटू कुमार के नेतृत्व में सुलतानगंज के विपिन कुमार, जगदीशपुर के ओम प्रकाश शर्मा, रंगरा के अजय पासवान, कहलगांव के रामप्रवेश दास, पीरपैंती के सुबोध कुमार सिन्हा, नाथनगर के संजीव कुमार, शाहकुंड के विशुन देव पंडित और सन्हौला के अमन कुमार बिंद जैसे प्रखंड अध्यक्ष संगठन को मजबूत कर रहे हैं।

पत्रकार: रामप्रीत यादव

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